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उप्र में उठी मांग, UP निकाय चुनाव में उर्दू भाषा का इस्तेमाल किया जाए

उत्तर प्रदेश में दो भाषाएँ सबसे ज्यादा प्रचलित हैं एक हिंदी और उसके बाद उर्दू का नंबर आता है। हालाँकि सबसे ज़्यादा प्रचलित तो इन दोनों भा...

उत्तर प्रदेश में दो भाषाएँ सबसे ज्यादा प्रचलित हैं एक हिंदी और उसके बाद उर्दू का नंबर आता है। हालाँकि सबसे ज़्यादा प्रचलित तो इन दोनों भाषाओं का मिलाजुला रूप है। अगर बात उर्दू की करें तो लखनऊ समेत प्रदेश में कई ऐसे शहर हैं जहां इस भाषा के चाहने वाले बड़ी संख्या में हैं।

इसी तरह की तमाम बातों को देखते हुए डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ट्रस्ट ने मांग की है कि राज्य निर्वाचन आयोग उर्दू ज़बान को मिले दूसरी राजभाषा के दर्जे को ध्यान में रखते हुए निकाय चुनाव में इसका इस्तेमाल करे। इस बारे में ट्रस्ट के अध्यक्ष अब्दुल नसीर नासिर ने राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा है। पिछले कई सालों में ये मांग उठती रही है। कि उर्दू ज़बान को सरकारी काम काज में ठीक से इस्तेमाल किया जाए ताकि जो लोग सिर्फ़ उर्दू जानते हैं उन्हें परेशानी ना हो।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कल मशहूर उर्दू लेखक अब्दुल क़ावी देसनावी का जन्मदिवस था। उनका जन्म 1 नवम्बर 1930 को हुआ था, और 7 जुलाई, 2011 को भोपाल में उनका देहांत हो गया था। इस मौक़े पर गूगल ने उनकी याद में डूडल बनाया था। देसनावी ने उर्दू के मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब, मुहम्मद इक़बाल और डॉ अब्दुल कलाम आज़ाद के बारे में काफ़ी काम किया था। इतना ही नहीं बल्कि उन्हें अपनी ज़िन्दगी में कई अवार्ड से नवाज़ा भी गया था।
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